मेडिकल पर्सनल लोन क्या है?
(इलाज के लिए तुरंत मिलने वाला आर्थिक सहारा)
आज के समय में इलाज का खर्च बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। अस्पताल में भर्ती, ऑपरेशन, दवाइयाँ, जाँच और डॉक्टर की फीस—इन सब पर अचानक बड़ा खर्च आ जाता है। कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि इलाज तो ज़रूरी होता है, लेकिन पास में पूरे पैसे नहीं होते। ऐसे समय में मेडिकल पर्सनल लोन एक बहुत बड़ा सहारा बनता है।
मेडिकल पर्सनल लोन एक ऐसा बिना गारंटी वाला लोन होता है, जिसे खास तौर पर इलाज से जुड़े खर्चों के लिए लिया जाता है। इसमें आपको अपनी कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती और पैसा जल्दी मिल जाता है।
मेडिकल पर्सनल लोन क्यों ज़रूरी होता है?
हर किसी के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं होता और अगर होता भी है, तो कई बार पूरा खर्च कवर नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में मेडिकल पर्सनल लोन बहुत काम आता है।
इसके ज़रिये आप इन खर्चों को आसानी से संभाल सकते हैं:
- ऑपरेशन का खर्च
- अस्पताल में भर्ती होने का खर्च
- महंगी दवाइयाँ
- जाँच और टेस्ट
- इलाज के बाद की देखभाल
मेडिकल पर्सनल लोन के मुख्य फायदे
1. बिना गारंटी लोन
इस लोन के लिए आपको घर, ज़मीन या सोना गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं होती।
2. जल्दी पैसा मिलता है
मेडिकल इमरजेंसी में समय बहुत कीमती होता है। यह लोन जल्दी अप्रूव होकर सीधे बैंक खाते में आ जाता है।
3. किसी भी इलाज के लिए
सरकारी या निजी अस्पताल, देश के अंदर या बाहर—यह लोन किसी भी इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।
4. आसान किस्तों में भुगतान
लोन को आप EMI में चुका सकते हैं, जिससे एक साथ बोझ नहीं पड़ता।
मेडिकल पर्सनल लोन कौन ले सकता है?
मेडिकल पर्सनल लोन लेने के लिए आम तौर पर ये योग्यताएँ होती हैं:
- आवेदक की उम्र 21 से 58 वर्ष के बीच
- नौकरीपेशा या स्वरोज़गार करने वाला व्यक्ति
- नियमित मासिक आय
- अच्छा या औसत क्रेडिट स्कोर
- भारतीय नागरिक होना चाहिए
कई बैंक मरीज के परिवार के सदस्य को भी लोन लेने की अनुमति देते हैं।
मेडिकल पर्सनल लोन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
मेडिकल पर्सनल लोन लेते समय आमतौर पर ये काग़ज़ात लगते हैं:
- मेडिकल पर्सनल लोन पर ब्याज दर
मेडिकल पर्सनल लोन की ब्याज दर बैंक और आपकी प्रोफ़ाइल पर निर्भर करती है।
यह ब्याज दर आम तौर पर पर्सनल लोन के बराबर या थोड़ी अधिक हो सकती है।